Monday 22 October 2007

खूनी बन्दर महाराज


अगर कोई बन्दर किसी का खून कर दे तो उसे क्या सजा मिलनी चाहिऐ? शायद आप सोचेंगे कि ये मैं क्या कह रह हूँ....क़ानूनी रुप से उस बंदर पर धारा ३०२ लगाया जाना चाहिऐ जिसे उप मेयर सतविंदर सिंह बजवा को छत से गिरने पर मजबूर कर दिया...
कोर्ट ने सरकार को सख्त रुप से पहले भी कहा था कि दिल्ली के बंदरों को ज़ल्दी से ज़ल्दी दिल्ली से टाटा बाय बाय कर दे लेकिन हमारी सरकार के कानों पर जू तक न रेगा....
दिल्ली का शायद ही कोई सरकारी विभाग हो जहाँ बन्दर महाराज के दर्शन नहीं होते....बात ज्यादा दिनों पुरानी नहीं है...जब मैं अपने एक मित्र के आकाशवाणी गया था....अभी हम न्यूज़ डी जी के कमरे के पास पहुंचे ही थे कि एक मोटे ताजे बन्दर महाराज ने हमे घेर लिया....उस वक़्त मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि बन्दर महाराज भी समाचार कि दुनिया से जुडे हुए हैं....
प्रधानमंत्री से लेकर दिल्ली कि मुख्य मंत्री आवासों मे भी बन्दर महाराज ने अपना सम्राज कायम कर रखा था...
आपने सोचा ही होगा कि मैं बार बार बन्दर को बन्दर महाराज क्यों कह रहा हूँ अरे महाराज बन्दर को बन्दर नहीं हनुमान जी का अवतार माना जाता है और ज़्यादातर धार्मिक लोग बन्दर को हनुमान जी ही बुलाते हैं और उन्हें केले, फल भी भोग लगते हैं....जानवरों को खिलाना बहुत शुभ माना जाता है....
अब भला आप ही बताये अगर किसी को मुफ्त का भोजन मिलेगा तो वह कहीं और क्यों जाएगा....बन्दर महाराज भी हनुमान जी के नाम पर फ्री कि पेट पूजा किये जा रहे है....कुछ अंध विश्वासों के कारन लोग बंदरों को पनाह देने का काम कर रहे हैं....भाई साहब ज़रा उन लोगों को भी २ केले दी दिया कीजिए जो बेचारे २ दिनों से भूखे हैं...यह लिखने से अगर आपकी आस्था को ठेस पहुची हो तो इस नादान को माफ करें...

2 comments:

आदिवासी said...

संदीप जी बिलकुल ठीक लिखा है।

हरिराम said...

"वानर सेना" को तो रावण की सारी सेना भी नहीं रोक पाई, उलटे विनष्ट हो गई। फिर पुलिस बल की क्या मजाल! लोगों ने हनुमान जी की पूजा तहेदिल के साथ करनी शुरू कर दी है।