Tuesday 17 March 2009

२०० के रिचार्ज पर 1 बियर फ्री

ये ज़रूर अटपटा है लेकिन सच है....पिछले दिनों जब मैं अपने गृह नगर गया था तो वहां की एक दुकान के बाहर मुझे ये लिखा मिला. मोबाइल और घडी में ज्यादा फर्क नहीं रह गया है...एक अनुमान के मुताबिक मोबाइल उपभोक्ता के मामले में विश्व में भारत का स्थान दूसरा है. यहाँ के बाज़ार को देख कर कई मोबाइल कंपनियों ने यहाँ अपना धंधा शुरू किया है. पिछले ८ सालों से मैं भी एक मोबाइल उपभोक्ता हूँ. मैंने जो अनुभव किया है, उसके अनुसार आज मोबाइल कंपनिया उपभोक्ताओ पर हावी है. मैंने अबतक दो ही कंपनियों के मोबाइल की सेवा ली है. पिछले ३ सालों से MTNL का उपभोक्ता हूँ. दुःख इस बात का है की आज हम मोबाइल से बात कर किसी से न मिलने की कसर निकाल लेते है. SMS ने चिट्ठी लिखने की आदत ख़तम कर दी है. अब मोबाइल केवल बातचीत करने का यन्त्र नहीं रह गया है बल्कि चल्ताफिरता मनोरंजन यन्त्र बन गया है. मोबाइल को फायदे और नुक्सान पर बहस होती रहती है. मैं भी उन्ही में से हूँ जो ग्लास को आधा भरा हुआ देखते है. कुछ लोगो को लिए ये अपराध का एक आसान जरिया बन गया है...सरकार ने मोबाइल से होने वाले अपराधो पर लगाम कसने की कोशिश की है लेकिन वो ऊँट को मुँह में जीरा को बराबर है...MMS ने कई लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद की है. दरअसल गलती मोबाइल की नहीं है, ये तो उस खुराफाती दिमाग की करतूत है जो किसी उपयोगी यन्त्र का दुरुपयोग करने से बाज नहीं आता..इस प्रकार की घटनाओ पर लगाम लगाना चाहिए. लेकिन ये तभी संभव है जब हम और आप अपने मोबाइल का सदुपयोग करें......