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Wednesday, 23 June 2010

उत्तरपूर्व की खबर क्या खबर नही है ?

उत्तरपूर्व की खबर क्या खबर नही है ? दिल्ली और मुंबई की खबरे ही राष्ट्रीय चैनल कहलाने वाले चैनलों पर छाए रहते हैं। दर्शक बेचारे मजबूर हैं। उन्हें जो दिखाया जाता है वो वही देखते हैं। और उसी को खबर मान लेते हैं। मुंबई और दिल्ली की खबर से छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के किसान को क्या फायदा हो सकता है। दरअसल आज के समाचार चैनल केवल वैसी ही खबरों को दिखाते हैं जिसका लेना देना केवल महानगरों में रहने वाले लोगो के लिया है।
अख़बारों में भले ही छोटी सी खबर आती है लेकिन मणिपुर के आर्थिक नाकेबंदी की खबर तो होती है। समाचार के देवतों को केवल वैसी ही खबर चाहिए होती है जिससे ज्यादा से ज्यादा टी आर पी मिले। उन्हें खबर से कोई लेना देना नही है। एक बच्ची के गड्ढे में गिरने की खबर को पूरे दिन भर दिखया जाता है और एक नाव के डूबने से ६० लोगो की मौत की खबर को १ मिनट का टाइम भी नही दिया जाता?
क्या समाचार चैनलों में वरिष्ठ पदों पर विराजमान महानुभाओं को ये दोयम सोच नज़र नही आती। ऐसा हो ही नही सकता। लेकिन उनके ऊपर भी तो उनके बॉस हैं जिनका आदेश भागवान का आदेश है। दर्शकों का ये भ्रम दूर होना ही चाहिए की समाचार चैनल को समाजसेवा या नैतिकता का काम नही कर रहे है। वो एक चोखा धन्धा कर रहे हैं।
अपराध, सेक्स, क्रिकेट, सिनेमा की खबरों को छोड़ कर शायद ही कोई खबर दिखती हो। भगवान भला करे की समाचार पत्र छप रहे हैं वरना खबरों को तो चैनल वाले खा ही जाते।