Saturday 3 May 2008

खाने पर नज़र




बचपन की बात है बगल में रहने वाली भाभी हमेशा अपने बेटे के बारे में कहते थी की वो कुछ खाता ही नही है, कल रात को १ रोटी ही खाकर सो गया। भाभी अपने बेटे की खुराक पर नज़र नही लगना चाहती थी। शायद कोई माँ अपने बेटे की खुराक के बारे में दुसरे को नहीं बताएगी। लेकिन कुछ लोग होते हैं जिनके पेट में इसलिए दर्द होने लगता है की किसी ग़रीब को अच्छा खाना मिल रहा है। इन्ही लोगों में से हैं कोंडोलीजा राइस और जोर्जे बुश।


मैडम कोंदिलिज़ा राइस ने कहा की भारतीय और चीनी अब अच्छा खाने लगे हैं इसीलिए साडी दुनिया में खाने की किल्लत हो गयी है।


काहे की किल्लत, अमेरिकी न जाने कितना अनाज अपने bio fule बनने में लगा देते है। उसका कोई हिसाब नही मांगता। न जाने कितने सालों बाद आज भारतीयों को २ वक्त की रोटी मिल पा रही है और उस पर भी निगोरा अमेरिका नज़र लगा रहा है। हर साल आने वाली बाढ़ और सूखे से लाखों लोग मरने की कगार पर पहुच जाते हैं। बचे खुचे को कुपोषण, गरीबी, प्राकृतिक प्रकोप मार देती है।


कोंदिलिज़ा राइस ने शायद उन लोगो को नही देखा है जो आज भी बुंदेलखंड और कालाहांडी में भूख से कुश्ती लड़ते हैं। इतनी बड़ी आबादी अपना पेट कैसे भरती है कोदिलिज़ा मैडम कभी खाना खिला कर दिखाईये।

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