Monday, 16 November, 2009

टी वी पर देख तमाशा देख

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) और दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) को बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में माना जाता है. यहाँ वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर के जूनियर डॉक्टर पिछले ७ दिनों से हड़ताल पर हैं. इस दौरान लगभग ७१ मरीजों कि जान चली गयी. राज्य मानवधिकार आयोग के ह़डताली जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का निर्देश दिया है। ये खबर कोई न्यूज़ चैनल नहीं दिखा रहा है. क्यों ? क्या ये खबर नहीं है? आप भी न्यूज़ चैनल ज़रूर देखते होंगे. कितनी बार आपने ये खबर देखि या सुनी है?
मैं बहुत कम समय के लिए सभी न्यूज़ चैनलों को दिन में २-३ बार देख ही लेता हूँ. सचिन तेंदुलकर के २० साल पूरे करने पर सभी न्यूज़ चैनलों और न्यूज़ पेपरों ने ३ दिन तक इस न्यूज़ को खीचा. बिग बॉस के घर में क्या चल रहा है इस न्यूज़ बना कर दिन के कई घंटे दर्शकों को मुर्ख बनाया जा रहा है. हद हो गयी ही न्यूज़ चैनल किसी भी लिहाज से न्यूज़ चैनल नहीं लगता. एक प्रोग्राम है सास बहु और साजिश, दोपहर के ३ बजे आने वाले इस प्रोग्राम से मिलतेजुलते प्रोग्राम को ३ न्यूज़ चैनल एक ही समय पर दिखाते हैं...न्यूज़ चैनल परचून के दूकान के सामान लगता है. एक ही खबर को इतना खीचा जाता है कि उससे दर्शको में उब सी होने लगती है.
मैंने एक दो लोगो से जानना चाहा कि वो कौन सा न्यूज़ चैनल पसंद करते हैं और क्यों? उनका जवाब चौकाने वाला था. उन्होंने एक विशेषज्ञ कि तरह न्यूज़ चैनलों कि बखिया उधेर दी. मुझे बहुत अच्छा लगा कि दर्शक ही बहुत जानकर होते हैं. उन्हें भी पता है कि कौन सी खबर महत्वपूर्ण है और कौन सी बकवास...
बहुत दुःख होता है ये सोच कर कि लोग मज़बूरी में उन खबरों को देखते हैं जिसे वो देखना नहीं चाहतें. मीडिया से जनसरोकार ख़त्म होता जा रहा है. और उसकी जगह व्यापार बनता जा रहा है. टी आर पी की अंधी दौर में कुछ चैनल जनसरोकार की खबरें दिखाते है तो उन्हें इसके घाटा ही उठाना पड़ता है और जो चैनल अजब गजब खबरे दिखाते है. वो नंबर १ बन जाते हैं. वाह रे टी वी की दुनिया...

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